लॉकडाउन की वजह से केंद्र का बड़ा फैसला, एनपीआर प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित

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NPR

कोरोना महामारी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर यानी कि एनपीआर को अपडेट करने की प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक के लिए रोक दिया है। एनपीआर की प्रक्रिया कई राज्य 1 अप्रैल से शुरू करने वाले थे, लेकिन कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और इसके संभावित खतरों का आकलन करते हुए गृह मंत्रालय ने कहा है कि अगले आदेश तक एनपीआर को अपडेट करने की प्रक्रिया स्थगित की जाती है।

पहले चरण की जनगणना भी रूकी

कोरोना का प्रसार रोकने के लिए सरकार ने लोगों से सामाजिक दूरी का पालन करने को कहा है। इस हालत में एनपीआर की प्रक्रिया मुश्किल थी। इसको ध्यान में रखते हुए सरकार ने जनगणना 2021 के पहले चरण और एनपीआर को अपडेट करने की प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक के लिए टाल दी है।

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क्या है एनपीआर ?

एनपीआर यानी ‘राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर’, जिसका आधार नागरिकता कानून 1955 के तहत केंद्र सरकार द्वारा 2003 में तैयार ‘नागरिकता नियम’ है। ये वही नियम हैं जो भारतीय नागरिकों के राष्ट्रीय रजिस्टर के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं।

‘जनसंख्या रजिस्टर’ का मतलब है कि ऐसा रजिस्टर जिसमें गांव या ग्रामीण इलाके या शहर अथवा वार्ड या एक शहर या शहरी इलाके के वार्ड के तहत (नागरिक पंजीयन महापंजीयक द्वारा) सीमांकित क्षेत्र के निवासियों का ब्योरा उपलब्ध हो।” महापंजीयक एवं जगनणना आयुक्त कार्यालय एनपीआर को ‘देश के आम निवासियों की एक पंजी’ के रूप में वर्णित करता है। एनपीआर के उद्देश्य से सामान्य निवासी वैसा व्यक्ति है जो एक स्थान पर पिछले छह माह या उससे अधिक समय तक रह चुका हो और वहां अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक रहने का इरादा रखता हो।

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