नमस्कार,
मैंने वर्ष 2019 में वाराणसी में वैध रजिस्ट्री के माध्यम से भूमि खरीदी थी। हाल ही में पता चला कि उपजिलाधिकारी (एस.डी.एम.) द्वारा फरवरी 2025 में आदेश पारित किया गया है, जिसमें उक्त भूमि को सरकारी तालाब घोषित करते हुए राजस्व अभिलेखों में पुनः दर्ज किया गया है। भूमि क्रय के समय तहसील/रजिस्ट्री कार्यालय से कोई आपत्ति या प्रतिबंध नहीं बताया गया था। ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्व विभाग (लेखपाल/तहसीलदार) और रजिस्ट्री कार्यालय की लापरवाही या मिलीभगत से सरकारी भूमि की गलत रिपोर्टिंग व रजिस्ट्री की गई।
मैं एक सद्भावनापूर्ण (bona fide) खरीदार हूँ और मेरे पास सभी वैध दस्तावेज हैं (बिक्री विलेख, खतौनी आदि)।
कृपया उचित कानूनी सलाह देने की कृपा करें।
मेरे जैसे निर्दोष खरीदार के लिए क्या कानूनी उपाय उपलब्ध हैं?
क्या मैं विक्रेता और जिम्मेदार अधिकारियों पर एफ.आई.आर. दर्ज कर सकता हूँ?
क्या मैं विभागीय लापरवाही के लिए सरकार से मुआवज़ा (compensation) मांग सकता हूँ?
क्या मुझे पहले सिविल कोर्ट, हाईकोर्ट या जिलाधिकारी कार्यालय में जाना चाहिए?
Vikash Mishra